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चुपचाप सड़ रही किडनी, शरीर के इन 4 हिस्सों में सूजन रेड फ्लैग, न करें इग्नोर

शरीर में सूजन को बहुत ही नॉर्मल मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. अक्सर लोग इसे हल्की समस्या मान लेते हैं. जबकि अगर शरीर के कुछ हिस्सों में सूजन लगातार बनी रहे, तो यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है. इसकी एक गंभीर वजह क्रॉनिक किडनी डिजीज भी है. जब किडनी सही से काम नहीं करती, तो शरीर से अतिरिक्त तरल और गंदगी बाहर नहीं निकल पाता, जिससे सूजन दिखाई देने लगती है. इसे मेडिकल भाषा में एडिमा कहा जाता है. यह सूजन धीरे-धीरे बढ़ती है.

इसके अलावा, किडनी की बीमारी में शरीर से जरूरी प्रोटीन भी पेशाब के जरिए निकलने लगता है. खून में प्रोटीन की कमी होने से भी सूजन बढ़ सकती है. ऐसे में ये समझना जरूरी है कि कौन सा सूजन नॉर्मल है और कौन-सा सूजन किडनी डैमेज का इशारा. यदि आपको शरीर के इन 4 हिस्सो में सूजन दिखाई दे रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें.

किडनी डैमेज होने पर किन हिस्सों में सूजन दिखता है?

आंखों के आसपास सूजन

इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी के अनुसार, खासकर सुबह के समय आंखों के आसपास सूजन या पफीनेस कभी-कभी किडनी की समस्या से जुड़ी हो सकती है. जब किडनी खराब होती है और प्रोटीन पेशाब में लीक होता है, तो शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और तरल पदार्थ पलक जैसे कोमल हिस्सों में जमा हो जाता है. यह सूजन लगातार बनी रह सकती है और आराम करने से भी ठीक नहीं होती.

पैरों और टखनों में सूजन

पैर और टखने शरीर में सूजन दिखने की सबसे आम जगह होती हैं. WebMD के अनुसार, जब किडनी की कार्यक्षमता कम होती है, तो अतिरिक्त तरल शरीर के निचले हिस्सों में जमा हो जाता है. इससे जूते तंग लग सकते हैं, मोजों के निशान पड़ सकते हैं और दिन के अंत तक सूजन बढ़ सकती है.

हाथों और उंगलियों में सूजन

किडनी से जुड़ी तरल की समस्या हाथों और उंगलियों को भी प्रभावित कर सकती है. अंगूठियां अचानक टाइट लगने लगती हैं और उंगलियां सूजी हुई दिख सकती हैं. यह सूजन सुबह या ज्यादा नमक खाने के बाद अधिक दिखाई दे सकती है.

पेट में सूजन

गंभीर मामलों में पेट में तरल जमा हो सकता है, जिससे पेट फूला हुआ या भारी लग सकता है. इसे एस्काइटिस कहा जाता है. यह गंभीर किडनी समस्या या शरीर में तरल संतुलन बिगड़ने की स्थिति से जुड़ा हो सकता है.

किडनी बीमारी के अन्य संकेत

सूजन के अलावा अन्य लक्षण भी हो सकते हैं जैसे थकान, पेशाब कम आना, झागदार पेशाब, मतली, मांसपेशियों में ऐंठन और लगातार खुजली. हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज किडनी बीमारी के प्रमुख जोखिम कारक हैं. शुरुआती चरण में लक्षण कम दिखते हैं, इसलिए नियमित जांच जरूरी है.

डॉक्टर से कब मिलें

अगर सूजन बार-बार हो, बढ़ती जाए या इसके साथ थकान, सांस लेने में परेशानी या पेशाब में बदलाव जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है. डॉक्टर ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट और इमेजिंग के जरिए किडनी की जांच कर सकते हैं. समय पर पहचान और इलाज से किडनी की बीमारी की गति को धीमा किया जा सकता है और जटिलताओं से बचा जा सकता है. इसलिए आंखों, पैरों, हाथों या पेट में लगातार सूजन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

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