क्राइमछत्तीसगढ़

सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद महादेव नेटवर्क में मची हलचल, करोड़ों की संपत्तियों पर विवाद की चर्चा

ओमान से भारत लाए जाने के बाद जांच एजेंसियों के रडार पर अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, बेनामी निवेश और विदेशी पासपोर्ट का रहस्य

रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के कथित प्रमुख प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की ओमान से भारत वापसी के बाद इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई अनसुलझे पहलुओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक ओर जांच एजेंसियां उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, कथित अवैध कमाई और विदेशी पहचान से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच आर्थिक हितों और संपत्तियों के बंटवारे को लेकर मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि, संपत्तियों पर नियंत्रण और कारोबारी विवाद से संबंधित इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कारोबारी साझेदारों के बीच बढ़ी दूरी, निवेश पर नजर

महादेव ऐप के दूसरे प्रमुख प्रमोटर रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर के बीच कारोबारी संबंध पहले ही अलग होने की जानकारी सामने आती रही है। सूत्रों के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग अब रवि उप्पल के साथ बताए जा रहे हैं, जबकि सौरभ के करीबी माने जाने वाले कुछ लोगों के भी उसके भारत आने के बाद अलग रुख अपनाने की चर्चा है।

सूत्रों का दावा है कि सट्टेबाजी से अर्जित कथित अवैध धनराशि का निवेश शेयर बाजार, होटल, खनन कारोबार और बड़ी कंपनियों में किया गया हो सकता है। अब इन निवेशों और संपत्तियों पर वास्तविक नियंत्रण किसका है, इसे लेकर नेटवर्क के भीतर खींचतान की बातें सामने आ रही हैं। जांच एजेंसियों की ओर से फिलहाल इन निवेशों के संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

विदेशी पासपोर्ट में मिला दूसरा नाम, पहचान पर उठे सवाल

सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू कथित इंडोनेशियाई पासपोर्ट भी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, उसके पास से बरामद पासपोर्ट में ‘अजंता मेंडिस’ नाम दर्ज होने की बात सामने आई है। बताया गया है कि पासपोर्ट में दर्ज तस्वीर सौरभ की है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस दस्तावेज में जन्मतिथि 11 मार्च 1998 अंकित है। पासपोर्ट 21 जून 2024 को जारी हुआ और इसकी वैधता 21 जून 2034 तक बताई गई है। सीबीआई ने अदालत में पेशी के दौरान इस कथित विदेशी पासपोर्ट को जब्त किए जाने की जानकारी दी थी।

अब जांच का महत्वपूर्ण विषय यह है कि यह दस्तावेज कहां तैयार हुआ, इसके लिए किन कागजातों का इस्तेमाल किया गया और क्या इसी पहचान के आधार पर उसने अलग-अलग देशों की

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