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बंगाल से बिहार तक बाढ़ का खतरा, तटबंधों की निगरानी बढ़ी; राहत शिविर तैयार

लगातार हो रही भारी बारिश ने पश्चिम बंगाल और बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। दामोदर घाटी के जलग्रहण क्षेत्रों में पिछले 24 घंटों से जारी बारिश को देखते हुए दामोदर घाटी जलाशय विनियमन समिति (DVRRC) ने पश्चिम बंगाल के सिंचाई विभाग को बाढ़ को लेकर ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी करने की सलाह दी है। वहीं, पड़ोसी राज्यों में लगातार बारिश और जलाशयों से पानी छोड़े जाने के बाद पटना प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है।

मैथन और पंचेत जलाशयों से बढ़ाई गई पानी की निकासी

केंद्रीय जल आयोग के अधीन DVRRC ने दामोदर नदी पर स्थित मैथन और पंचेत जलाशयों से पानी छोड़ने की मात्रा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। समिति के सदस्य सचिव संजीव कुमार के अनुसार, लगातार बारिश के कारण सहायक नदियों से बड़ी मात्रा में पानी जलाशयों में पहुंच रहा है। ऐसे में गुरुवार सुबह तक जल निकासी की मात्रा में और वृद्धि की जा सकती है।

दुर्गापुर स्थित दामोदर बैराज से पानी की निकासी बढ़ाकर 1,11,600 क्यूसेक कर दी गई है। बैराज का जलस्तर 210.80 फुट तक पहुंच चुका है, जबकि इसका अधिकतम निर्धारित स्तर 211.50 फुट है। दक्षिण बंगाल की प्रमुख नदी घाटियों में रातभर हुई भारी बारिश के बाद जल निकासी बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

इन इलाकों में बढ़ा बाढ़ का खतरा

जलस्तर बढ़ने के कारण पूर्व बर्दवान, हुगली और हावड़ा के निचले इलाकों में गुरुवार को बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जलाशयों में पानी की आवक और मौसम की स्थिति को देखते हुए आगे भी जल निकासी में बदलाव किया जा सकता है।

पटना में तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी

बिहार में भी संभावित बाढ़ को देखते हुए पटना जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बाणसागर बैराज और इंद्रपुरी जलाशय से पानी छोड़े जाने के साथ ही पड़ोसी राज्यों में भारी बारिश को देखते हुए जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

कमजोर तटबंधों वाले इलाकों में विशेष निगरानी रखने के साथ रेत की बोरियां, नायलॉन क्रेट, ट्रैक्टर, जनरेटर और अन्य जरूरी सामग्री पहले से उपलब्ध रखने को कहा गया है। कर्मचारियों की चौबीसों घंटे तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

राहत शिविरों में भोजन से लेकर दवाओं तक की तैयारी

संभावित बाढ़ की स्थिति में प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविरों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन ने शिविरों में पेयजल, शौचालय, रोशनी, भोजन और दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था रखने के निर्देश दिए हैं।

इसके अलावा सामुदायिक रसोई और चिकित्सा शिविर संचालित करने की तैयारी भी की गई है। चिकित्सा केंद्रों में सामान्य दवाओं के साथ जीवनरक्षक दवाएं तथा सांप और कुत्ते के काटने की दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा गया है।

आपात स्थिति में सूचनाओं के आदान-प्रदान और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए जिला स्तर पर 24 घंटे संचालित नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय कर दिया गया है।

नेपाल में भी बाढ़ से भारी तबाही

इस बीच नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, आठ प्रभावित जिलों से और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या 1,204 तक पहुंच गई है। वहीं, करीब 4,216 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

बाढ़ के एक सप्ताह बाद भी बचावकर्मी प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। देश के मध्य हिस्सों में कई कस्बों और गांवों को बाढ़ से भारी नुकसान पहुंचा है। लापता लोगों के परिजनों ने कई स्थानों पर प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी किया है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने आपदा के जलवायु परिवर्तन से संभावित संबंध का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने प्रमुखता से उठाने की बात कही है।

बारिश जारी रही तो और बढ़ सकती है मुश्किल

पश्चिम बंगाल और बिहार में लगातार बारिश, जलाशयों में बढ़ती पानी की आवक और बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण आने वाले घंटों में स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी रहेगी। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा सकती है।

फिलहाल दोनों राज्यों में राहत और बचाव की तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते सहायता पहुंचाई जा सके।

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