
बांग्लादेश चुनाव में BNP यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी बड़ी जीत के करीब है। अब तक के नतीजों में पार्टी बहुमत का आंकड़ा पार कर चुकी है। इसके साथ ही पार्टी प्रमुख तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की अटकलें तेज हो गईं हैं। हालांकि, अब तक अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। रहमान बांग्लादेश की पूर्व पीएम दिवंगत खालिदा जिया के बेटे हैं। मुल्क में बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधनों के बीच सीधा मुकाबला है।
60 वर्षीय तारिक रहमान बांग्लादेश में प्रधानमंत्री पद के प्रबल उम्मीदवार के तौर पर उभरे हैं। बीएनपी पहले ही कह चुकी थी कि अगर जिया चुनाव के बाद शारीरिक रूप से सक्षम नहीं रहीं तो तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद दिया जा सकता है। तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रह चुकीं और बीएनपी की प्रमुख नेता खालिदा जिया का 30 दिसंबर को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था।
जिया के निधन के बाद रहमान 17 वर्षों के स्व-निर्वासन के बाद 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटे थे। इसके बाद उन्हें बीएनपी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। साल 2008 से ही वह लंदन में रह रहे थे और वर्चुअल माध्यमों के जरिए पार्टी का नेतृत्व करते रहे।
उन्हें 2002 में बीएनपी का वरिष्ठ संयुक्त महासचिव बनाया गया था और 2009 में वह वरिष्ठ उपाध्यक्ष बने। 2018 में जब खालिदा जिया को जेल में रखा गया था, तब रहमान को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तारिक रहमान ने इरशाद विरोधी आंदोलन के दौरान अपनी मां के साथ सड़क प्रदर्शनों में भाग लिया था। उन्होंने 1988 में पार्टी की गबतली उपजिला इकाई के सामान्य सदस्य के रूप में औपचारिक रूप से बीएनपी में शामिल हुए। 1991 के राष्ट्रीय चुनाव से पहले, उन्होंने देश के लगभग हर जिले में बेगम खालिदा जिया के साथ प्रचार किया। 1993 में, उन्होंने बीएनपी की बोगुरा जिला इकाई का एक सम्मेलन आयोजित किया, जहां गुप्त मतदान के माध्यम से नेतृत्व का चुनाव हुआ।
भारतीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस तथ्य के बावजूद कि बेगम खालिदा जिया के दो कार्यकाल के दौरान बीएनपी ने बंगलादेश ने कट्टरपंथी इस्लामवादी समूहों और पाकिस्तान समर्थक रुख अपनाया था, भारत तारिक रहमान के साथ काम कर सकता है। घोषणापत्र में भी बीएनपी ने सामूहिक प्रगति के लिए पड़ोसी देशों के साथ संबंध बनाने की बात कही गई है। रहमान द्वारा जारी 51-सूत्री घोषणापत्र में हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए वित्त-पोषण बढ़ाने का भी वादा किया गया है।




