कार्यालय से फील्ड तक दिखे सक्रियता – अरुण साव

- ‘निर्माण मंथन’ कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा- विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अभियंताओं की अहम भूमिका
- सड़क, पुल और भवन निर्माण से लेकर गुणवत्ता नियंत्रण, सर्वेक्षण और निविदा प्रक्रिया तक दी गई जानकारी
रायपुर । छत्तीसगढ़ में सड़क, पुल और भवन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बेहतर बनाने के उद्देश्य से लोक निर्माण विभाग (PWD) ने राज्य स्तरीय कार्यशाला ‘निर्माण मंथन’ का आयोजन किया। रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला में प्रदेशभर के अभियंताओं को आधुनिक निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और नवाचार से जुड़ा प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव शामिल हुए। इसमें मुख्य अभियंता से लेकर उप अभियंता तक के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) रायपुर के विशेषज्ञों और विभाग के वरिष्ठ अभियंताओं ने सड़क, पुल एवं भवन निर्माण, सर्वेक्षण, प्राक्कलन, निविदा प्रक्रिया और रखरखाव जैसे विषयों पर तकनीकी जानकारी साझा की।
विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अभियंताओं की अहम भूमिका : अरुण साव
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अभियंताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के शिल्पकार हैं। राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। लोक निर्माण विभाग प्रदेश के विकास का ग्रोथ इंजन है और राज्य गठन के बाद से छत्तीसगढ़ में हुए बदलावों में विभाग का बड़ा योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ अभियंताओं को नई तकनीक, आधुनिक मशीनरी और बेहतर कार्यप्रणाली अपनानी होगी। अधिकारियों को अपनी दक्षता बढ़ाते हुए खुद को लगातार अपडेट और अपग्रेड करना चाहिए।
साव ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि खराब या त्रुटिपूर्ण निर्माण से पूरे विभाग की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है। इसलिए निर्धारित मानकों का पालन करते हुए कार्यालय और फील्ड, दोनों स्तरों पर सक्रियता से काम करना जरूरी है।
फील्ड और फाइल दोनों का काम रखें दुरुस्त
लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने कहा कि निर्माण कार्यों को सकारात्मक सोच और टीमवर्क के साथ पूरा किया जाना चाहिए। कार्यशाला में मिली तकनीकी जानकारी को अधिकारी अपने काम और फील्ड में लागू करें।
उन्होंने अभियंताओं को देश में हुए उत्कृष्ट सड़क, पुल और भवन निर्माण कार्यों का अध्ययन करने तथा एक्सपोजर विजिट के माध्यम से नई तकनीकों को समझने की सलाह दी। उन्होंने नवाचार और बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने के साथ ठेकेदारों एवं निर्माण एजेंसियों के साथ किए गए अनुबंधों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा।
बंसल ने कहा कि नई परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार करते समय भविष्य की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए। सड़कों पर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट को दूर करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों के साथ विभागीय दस्तावेजों और प्रक्रियाओं को भी व्यवस्थित रखना जरूरी है।
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच के बाद ही हो भुगतान
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी ने निर्माण प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभाग ने सड़कों की परफॉर्मेंस गारंटी की अवधि तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दी है।
उन्होंने कहा कि निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता का कड़ाई से परीक्षण करने के बाद ही ठेकेदारों को भुगतान किया जाना चाहिए। अभियंताओं को केवल कंसल्टेंट और एजेंसियों की रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं भी निर्माण कार्यों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने सड़कों की मजबूती बढ़ाने के लिए फ्लाई ऐश के उचित उपयोग की जानकारी भी दी।
इन तकनीकी विषयों पर दिया गया प्रशिक्षण
कार्यशाला में निर्माण कार्यों की योजना बनाने से लेकर गुणवत्ता नियंत्रण और रखरखाव तक के विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रमुख विषयों में शामिल रहे:
- सड़क निर्माण: रोलर कॉम्पैक्टेड कंक्रीट, व्हाइट टॉप कंक्रीट और फ्लेक्सिबल पेवमेंट तकनीक।
- पुल निर्माण: पुलों की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी मानक।
- भवन निर्माण: भवन निर्माण की तकनीक और रखरखाव।
- सर्वेक्षण एवं प्राक्कलन: परियोजनाओं की प्रारंभिक तैयारी और लागत निर्धारण।
- निविदा प्रक्रिया: निविदा दस्तावेज तैयार करने और संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी।
- डिजिटल सिस्टम: WAMIS, GePNIC और पंजीयन प्रक्रिया का प्रशिक्षण।
कार्यशाला में सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता एस.के. कोरी ने पुल निर्माण एवं गुणवत्ता नियंत्रण, जबकि कार्यपालन अभियंता पी.के. गुप्ता ने सर्वेक्षण और प्राक्कलन की जानकारी दी। अपर सचिव एस.एन. श्रीवास्तव ने निविदा दस्तावेजों की प्रक्रिया समझाई। वहीं छत्तीसगढ़ सड़क एवं अधोसंरचना विकास निगम (CGRIDCL) के अतिरिक्त प्रबंध संचालक शशांक पाण्डेय ने WAMIS, GePNIC और पंजीयन प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षण दिया।
कार्यशाला का उद्देश्य विभागीय अभियंताओं की तकनीकी दक्षता बढ़ाने, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने और आधुनिक तकनीकों एवं नवाचारों को अपनाकर प्रदेश की अधोसंरचना को मजबूत करना रहा।




