महासमुंद बिजली विभाग में मनमानी के आरोप, 10 साल से जमे अधिकारियों की मुख्यमंत्री से शिकायत

रायपुर। महासमुंद जिले के बिजली विभाग में अधिकारियों की लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापना और कथित मनमानी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अखिल भारतीय प्रशासनिक सुधार परामर्शी संगठन के कोरबा क्षेत्रीय कार्यालय ने इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र भेजकर शिकायत की है। संगठन ने अधिकारियों के कार्यकाल की जांच कर स्थानांतरण नीति के तहत कार्रवाई करने की मांग की है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि महासमुंद जिले में सहायक यंत्री और कार्यपालन यंत्री स्तर के कुछ अधिकारी पिछले 10 से 12 वर्षों से एक ही जिले में पदस्थ हैं। आरोप है कि विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बजाय कुछ अधिकारी कथित रूप से ठेकेदारी के कार्यों में संलिप्त हैं, जबकि उन्हें विभाग से नियमित वेतन मिल रहा है।
शिकायत में पंचूराम वर्मा का नाम लेते हुए आरोप लगाया गया है कि वे लंबे समय से महासमुंद जिले में पदस्थ हैं और विभागीय कार्यों के बजाय ठेकेदारी गतिविधियों में संलिप्त हैं। संगठन का आरोप है कि किसानों को ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने में अनावश्यक देरी की जाती है। नए बिजली कनेक्शन और जमा राशि वाले कनेक्शनों के मामलों में भी उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों से ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने के नाम पर पैसे मांगने के आरोप भी लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि समय पर ट्रांसफार्मर नहीं मिलने से किसानों की खेती प्रभावित हो रही है। वहीं, बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा फोन नहीं उठाने और जिम्मेदारियों से बचने की शिकायतें भी सामने आई हैं। क्षेत्र में बार-बार बिजली गुल होने, ब्रेकडाउन और रखरखाव के नाम पर बिजली आपूर्ति बाधित रहने से आम उपभोक्ता भी परेशान हैं।
शिकायत में रायगढ़ क्षेत्र के मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे मनीष तनेजा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि करीब 20 महीनों से मुख्य अभियंता के पद पर नियमित पदस्थापना नहीं हुई है और अतिरिक्त प्रभार के चलते प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि अधिकारियों की पदस्थापना और पदोन्नति की प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
संगठन ने ऊर्जा विभाग की स्थानांतरण नीति और तीन वर्षीय कार्यकाल संबंधी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि किसी अधिकारी को लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में पदस्थ रखना नियमों की भावना के विपरीत है। इसके बावजूद कुछ अधिकारी वर्षों से एक ही स्थान पर बने हुए हैं।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी है। किसानों को ट्रांसफार्मर और कनेक्शन के लिए परेशान होना पड़ रहा है, जबकि आम जनता को भी अनियमित बिजली आपूर्ति का सामना करना पड़ रहा है।
संगठन ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल और कथित ठेकेदारी गतिविधियों की जांच करने तथा दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री और ऊर्जा विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं।




