छत्तीसगढ़

CBSE की बड़ी पहल: अब तीसरी कक्षा के छात्र भी पढ़ेंगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस…

नई दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) अब देशभर के स्कूलों में प्राथमिक कक्षा के छात्रों को भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की पढ़ाई कराने की तैयारी कर रहा है। इस पहल के तहत एआई को किसी अन्य विषय के हिस्से के रूप में नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। बोर्ड का कहना है कि एआई भविष्य का कौशल है, इसलिए इसे मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली में समाहित करना समय की आवश्यकता है।2026-27 से तीसरी कक्षा से शुरू होगी एआई की पढ़ाईनई व्यवस्था के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 3 से आगे के छात्रों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को औपचारिक रूप से पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इस पहल के लिए शिक्षा मंत्रालय एक व्यापक “एआई इंटीग्रेशन फ्रेमवर्क” तैयार कर रहा है, जिसमें शिक्षकों और छात्रों दोनों को नई तकनीक के अनुरूप तैयार करने की रणनीति होगी।शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई का मानना है कि आने वाले वर्षों में शिक्षण और अधिगम पद्धतियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना जरूरी है। लक्ष्य यह है कि अगले दो से तीन साल में शिक्षक और विद्यार्थी एआई के साथ सहजता से काम कर सकें।शिक्षकों को मिल रही एआई टूल्स की ट्रेनिंगसीबीएसई की ओर से फिलहाल एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है, जिसमें शिक्षकों को एआई टूल्स की मदद से पाठ योजनाएं (Lesson Plans) तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य शिक्षार्थियों और शिक्षकों — दोनों को डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार करना है।कक्षा 6 से 12 तक पहले से चल रहा एआई मॉड्यूलवर्तमान में देशभर के 18,000 से अधिक सीबीएसई स्कूलों में एआई को एक कौशल विषय (Skill Subject) के रूप में पढ़ाया जा रहा है। कक्षा 6 से इसे 15 घंटे के मॉड्यूल के रूप में और कक्षा 9 से 12 तक इसे वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल किया गया है। अब बोर्ड की योजना है कि इसे और व्यवस्थित एवं व्यापक रूप में सभी छात्रों तक पहुंचाया जाए।भविष्य की शिक्षा की दिशा में बड़ा कदमविशेषज्ञों का मानना है कि सीबीएसई की यह पहल भारत में शिक्षा के टेक्नोलॉजी-इंटीग्रेटेड भविष्य की दिशा में एक अहम कदम है। एआई आधारित शिक्षा न सिर्फ बच्चों की समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें रोजगार बाजार की नई मांगों के लिए तैयार भी करेगी।

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