भारत

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 विशेष: लोगों को नहीं आ रही है चैन की नींद, इन इलाकों के लिए खतरे की घंटी

योग दिवस से पहले सेहत की बड़ी चेतावनी देखने को मिल रही है। रविवार, 21 जून 2026 को दुनिया भर में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर हर कोई सेहतमंद रहने की बात कर रहा है, लेकिन इसी बीच शहरी भारत की लाइफस्टाइल और सेहत को लेकर एक बहुत ही हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। भारत के मशहूर पर्सनलाइज्ड हेयर हेल्थ प्लेटफॉर्म Traya ने देश के लोगों की सेहत से जुड़ी एक बड़ी तस्वीर दुनिया के सामने रखी है।

यह रिपोर्ट मार्च 2026 में कराए गए एक डायग्नोस्टिक हेयर टेस्ट के आंकड़ों पर आधारित है। इस जांच में देश भर के 9,42,451 भारतीयों ने हिस्सा लिया था, जिनमें 5,62,088 पुरुष और 3,80,363 महिलाएं शामिल थीं। इस एनालिसिस में लोगों के बालों की सेहत के साथ-साथ उनके सोने के तौर-तरीकों, मानसिक तनाव और पेट की बीमारी जैसी तीन बड़ी आदतों की पड़ताल की गई है।

करोड़ों भारतीयों की आंखों से गायब हुई नींद

इस सर्वे में जो बातें निकलकर सामने आई हैं, वे बताती हैं कि भारत के लोगों की रातों की नींद उड़ चुकी है। अगर पूरे देश की बात करें तो लगभग 29.5% पुरुष और 35.4% महिलाएं खराब नींद (या तो रात में बार-बार आंख खुलना या बिस्तर पर जाने के बाद सोने में दिक्कत होना) की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। आंकड़ों में महिलाओं की स्थिति पुरुषों के मुकाबले थोड़ी ज्यादा चिंताजनक है।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 22.2% पुरुषों की नींद रात में कम से कम एक बार जरूर टूटती है, जबकि 26.2% महिलाओं के साथ भी यही दिक्कत है। वहीं, बिस्तर पर लेटने के बाद भी काफी देर तक नींद न आने से 7.3% पुरुष और 9.2% महिलाएं परेशान रहती हैं। यानी देश में पुरुषों और महिलाओं के बीच नींद की कमी का यह अंतर लगभग 6 प्रतिशत का है।

दक्षिण भारत में नींद का सबसे बुरा हाल

अगर हम देश के अलग-अलग इलाकों की बात करें, तो भौगोलिक रूप से दक्षिण भारत के लोगों की नींद सबसे ज्यादा खराब पाई गई है। कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केरल जैसे दक्षिणी राज्यों में पुरुषों और महिलाओं दोनों में ही नींद न आने की बीमारी सबसे अधिक देखी गई है। यहाँ 37.3% पुरुष और 39.9% महिलाएं इस समस्या से बेहाल हैं।

दक्षिण भारत देश का इकलौता ऐसा क्षेत्र है जहां लगभग 10 में से 4 लोग ठीक से सो नहीं पा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि त्रया हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ महिला और पुरुष के आंकड़ों में सिर्फ 2.6% का ही मामूली अंतर है, जिससे पता चलता है कि दक्षिण भारत में नींद की कमी किसी निजी वजह से नहीं बल्कि वहां के माहौल, पर्यावरण या काम के तौर-तरीकों की वजह से है। इसके उलट, उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब आदि) के पुरुष इस मामले में सबसे बेहतर हैं, जहां सिर्फ 25.6% लोगों की नींद खराब है।

महानगरों की कहानी: चेन्नई सबसे आगे

Traya द्वारा देश के बड़े शहरों यानी महानगरों में किए गए सर्वे बताते हैं कि तमिलनाडु का चेन्नई शहर नींद की कमी के मामले में पूरे देश में सबसे ऊपर है। चेन्नई में 42.6% पुरुष और 43.6% महिलाएं रात भर करवटें बदलते रहते हैं और यहाँ स्त्री-पुरुष का अंतर भी सिर्फ 1% है। इसके बाद हैदराबाद के 36.7% पुरुष व 40.5% महिलाएं और बेंगलुरु के 33.6% पुरुष व 38.3% महिलाएं इस संकट से जूझ रही हैं।

उत्तरी शहरों में राजस्थान का जयपुर सबसे सुकून वाला शहर है, जहां सिर्फ 23.3% पुरुषों की नींद खराब है। वहीं देश की राजधानी नई दिल्ली में सबसे बड़ा अंतर देखने को मिला है, जहाँ पुरुषों (28.0%) के मुकाबले महिलाएं (36.5%) कहीं ज्यादा जागने को मजबूर हैं। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का हाल भी दिल्ली जैसा ही है, जहां 40.2% महिलाएं और 32.5% पुरुष खराब नींद का शिकार हैं।

कोलकाता में पीएम मोदी और ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’

इसी बिगड़ती जीवनशैली और नींद के संकट के बीच इस साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” रखी गई है। यह थीम हमें याद दिलाती है कि योग के जरिए हम बढ़ती उम्र में भी पूरी तरह एक्टिव, ऊर्जावान, आत्मनिर्भर और बेहतर सेहत के मालिक बने रह सकते हैं। इस समय पूरे देश में कॉमन योगा प्रोटोकॉल (CYP) पर आधारित सामूहिक योग के अभ्यास कराए जा रहे हैं।

इस साल का सबसे मुख्य राष्ट्रीय योग कार्यक्रम पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर आयोजित होने जा रहा है। इस भव्य कार्यक्रम का नेतृत्व खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपने जीवन से तनाव और नींद की कमी को दूर भगाने के लिए योग को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा जरूर बनाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button