त्योहारी सीजन से पहले महंगा हुआ प्याज, सरकार ने उतारी ‘कांदा एक्सप्रेस’

नई दिल्ली। देश में त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले खाने-पीने की जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी आम लोगों के घरेलू बजट पर असर डाल रही है। चीनी के बाद अब प्याज के दाम में भी तेजी देखी जा रही है। बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के नाशिक से प्याज का बफर स्टॉक बड़े उपभोग केंद्रों तक पहुंचाना शुरू कर दिया है। इसके लिए विशेष रेलवे रेक ‘कांदा एक्सप्रेस’ का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बताया कि नाशिक से प्याज की आपूर्ति देश के प्रमुख कंजम्पशन सेंटर्स तक बढ़ाई जाएगी। रेलवे रेक पर लोड किया जा रहा प्याज बुधवार तक निर्धारित केंद्रों पर पहुंचने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य बाजार में उपलब्धता बढ़ाकर त्योहारी सीजन के दौरान प्याज की कीमतों में होने वाली मौसमी बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है।
59 फीसदी बढ़ा खुदरा भाव
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 24 अगस्त को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव सालाना आधार पर 59 फीसदी बढ़कर 43.53 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। पिछले साल इसी अवधि में औसत खुदरा कीमत 27.37 रुपये प्रति किलो थी। वहीं, औसत थोक भाव भी 68 फीसदी बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलो हो गया, जबकि एक साल पहले यह 21.23 रुपये प्रति किलो था।
देश के प्रमुख शहरों में भी प्याज की कीमतें काफी ऊंची हैं। सोमवार को चेन्नई में प्याज का खुदरा भाव 60 रुपये प्रति किलो, दिल्ली में 55 रुपये और कोलकाता में 53 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया।
पांच बड़े शहरों में पहले पहुंचेगा प्याज
सरकार के मुताबिक, शुरुआती चरण में नाशिक से भेजे जा रहे प्याज को चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी जैसे पांच बड़े उपभोग केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद बाजार की जरूरत और कीमतों की स्थिति को देखते हुए अन्य शहरों को भी इस आपूर्ति व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है।
नाशिक में रखे गए प्याज के बफर स्टॉक को विशेष रेलवे रेक के जरिए थोक मात्रा में भेजा जा रहा है। इसके बाद NCCF और NAFED के माध्यम से इसे थोक और खुदरा बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार की योजना के अनुसार बफर स्टॉक से प्याज को खुदरा बाजार में करीब 35 रुपये प्रति किलो की दर से बेचने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार के पास 1.21 लाख टन का बफर स्टॉक
केंद्र सरकार के पास इस साल करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक मौजूद है। यह स्टॉक कीमतों में अचानक तेजी आने या बाजार में आपूर्ति कम होने की स्थिति में इस्तेमाल किया जाता है। इसे NAFED और NCCF जैसी एजेंसियों के माध्यम से मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत खरीदा जाता है।
निधि खरे ने कहा कि सरकार प्याज की कीमतों पर लगातार नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कदम उठाए जाएंगे। उनके मुताबिक नाशिक की मंडी कीमतें दिल्ली से अधिक होना सामान्य स्थिति है, लेकिन बाजार में किसी तरह की गड़बड़ी या सट्टेबाजी की स्थिति पर भी निगरानी रखी जा रही है।
अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ते हैं दाम?
अधिकारियों के अनुसार अगस्त और सितंबर के दौरान प्याज की कीमतों में मौसमी बढ़ोतरी देखने को मिलती है। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने के अलावा मौसम संबंधी दिक्कतें, सप्लाई चेन में बदलाव और खपत के बदलते पैटर्न का भी कीमतों पर असर पड़ता है।
सरकार का दावा है कि पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है और ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए बड़े बाजारों में अतिरिक्त प्याज पहुंचाने से आपूर्ति की स्थिति बेहतर होगी। अब निगाह इस बात पर है कि सरकारी हस्तक्षेप के बाद आने वाले दिनों में प्याज की खुदरा कीमतों में कितनी राहत मिलती है।




