सुनील नामदेव समेत तीन पत्रकार बरी, ढाई साल चली कानूनी लड़ाई का आया फैसला

रायपुर/बिलासपुर। पत्रकार सुनील नामदेव, नीलेश शर्मा और साजिद हाशमी से जुड़े मामले में अदालत से राहत की खबर सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, बिलासपुर की अदालत ने करीब ढाई साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद तीनों पत्रकारों को मामले में बरी कर दिया है। यह मामला वर्ष 2023 में दर्ज हुआ था और इसकी सुनवाई के दौरान अभियोजन के साक्ष्यों तथा गवाहों को लेकर बचाव पक्ष ने कई सवाल उठाए थे।
2023 में दर्ज हुआ था मामला
मामला वर्ष 2023 में पत्रकारों की ओर से प्रकाशित-प्रसारित खबरों से जुड़ा था। इस प्रकरण में सुनील नामदेव के साथ नीलेश शर्मा और साजिद हाशमी को भी आरोपी बनाया गया था। जनवरी 2024 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनील नामदेव को इस मामले में नियमित जमानत दी थी। कोर्ट के आदेश में दर्ज है कि उनके खिलाफ बिलासपुर सिटी कोतवाली में विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
सुनवाई के दौरान गवाहों और जांच पर उठे सवाल
बचाव पक्ष की ओर से सुनवाई के दौरान जांच की प्रक्रिया और कुछ गवाहों के बयानों पर सवाल उठाए गए। बचाव पक्ष का दावा था कि मामले की कार्रवाई में कुछ दस्तावेजों और बयानों को लेकर गंभीर विसंगतियां थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान ऐसे बयान भी सामने आए जिनके आधार पर बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। हालांकि इन दावों को उसी रूप में देखा जाना चाहिए जिस रूप में वे अदालत की कार्यवाही में दर्ज या पक्षकारों की ओर से प्रस्तुत किए गए हैं।
सुनील नामदेव को पहले भी मिल चुकी है न्यायिक राहत
सुनील नामदेव इससे पहले भी अलग-अलग कानूनी मामलों का सामना कर चुके हैं। बिलासपुर मामले में जनवरी 2024 में हाईकोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दी थी। अदालत के आदेश के मुताबिक, इस मामले में चार अन्य प्रकरणों में भी उन्हें पहले जमानत मिल चुकी थी।
इसके अलावा, उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, एक NDPS मामले में भी सुनील नामदेव को विशेष अदालत से राहत मिल चुकी है। इस मामले में अभियोजन की प्रक्रिया और NDPS कानून के प्रावधानों के पालन को लेकर अदालत में सवाल उठे थे।
पत्रकारों की भूमिका को लेकर फिर चर्चा
तीनों पत्रकारों के बरी होने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। पत्रकार संगठनों और बचाव पक्ष की ओर से पहले यह आरोप लगाया जाता रहा है कि भ्रष्टाचार और प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर खबरें प्रकाशित करने के कारण पत्रकारों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
हालांकि किसी आपराधिक कार्रवाई के पीछे राजनीतिक उद्देश्य था या नहीं, इसका निष्कर्ष संबंधित न्यायिक आदेश, केस रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाना उचित होगा।
ढाई साल बाद मिला कानूनी निष्कर्ष
करीब ढाई वर्ष चली कानूनी प्रक्रिया के बाद तीनों पत्रकारों के मामले में अदालत का फैसला सामने आया है। इस फैसले के बाद सुनील नामदेव, नीलेश शर्मा और साजिद हाशमी को मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है।
यह प्रकरण एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि पत्रकारिता से जुड़े मामलों में जांच, साक्ष्य और कानूनी प्रक्रिया कितनी महत्वपूर्ण होती है। अंतिम फैसला अदालत के रिकॉर्ड और आदेश में दर्ज निष्कर्षों के आधार पर ही समझा जाना चाहिए।




