छत्तीसगढ़

आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन पर कब्जे के सवालों से डर रहे आदिवासी मुख्यमंत्री -देवलाल नरेटी

  • विश्व आदिवासी दिवस पर कार्यक्रम कराना तो दूर, बधाई संदेश तक नहीं दे सके सीएम साय- देवलाल नरेटी, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, आप

रायपुर। आम आदमी पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष देवलाल नरेटी ने छत्तीसगढ़ में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और भाजपा सरकार पर आदिवासी समाज की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जिस राज्य के मुख्यमंत्री स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं, उसी राज्य में 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज के लिए कोई बड़ा सरकारी आयोजन नहीं होना और मुख्यमंत्री की ओर से बधाई संदेश तक सामने नहीं आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लगता है मोदी जी की तरफ से कार्यक्रम नहीं आया होगा क्योंकि छत्तीसगढ़ के सारे तय कार्यक्रम दिल्ली से ही मैनेज़ होते हैं आप तो सिर्फ कठपुतली हैं?

नरेटी ने कहा कि मुख्यमंत्री साय आदिवासी समाज से नजर मिलाने से डर रहे हैं। आदिवासी समाज आज अपने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को लेकर सवाल पूछ रहा है, लेकिन भाजपा सरकार इन सवालों का जवाब देने के बजाय मुद्दे से भागती नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास और खनन के नाम पर आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिन जंगलों और जमीनों पर आदिवासी पीढ़ियों से निर्भर हैं, उन्हीं के अधिकारों और भविष्य को लेकर सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे समय में विश्व आदिवासी दिवस महज औपचारिकता नहीं, बल्कि आदिवासी अधिकारों और संवैधानिक संरक्षण की प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर था।

देवलाल नरेटी ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा चुनाव के समय आदिवासी समाज को सम्मान और अधिकार देने की बातें करती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद आदिवासियों की जमीन, जंगल और रोजगार से जुड़े सवालों पर चुप्पी साध लेती है। अगर सरकार आदिवासी समाज के प्रति वास्तव में संवेदनशील है तो उसे बताना चाहिए कि आदिवासी इलाकों में उनके अधिकारों की रक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। आदिवासी समाज केवल वोट बैंक नहीं है। उसके अधिकार, सम्मान और अस्तित्व की रक्षा करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री साय को कार्यक्रमों और नारों से आगे बढ़कर आदिवासी समाज के बीच जाना चाहिए और उनके सवालों का सामना करना चाहिए।

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