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राम मंदिर दान नेटवर्क पर बड़ा खुलासा! चंपत राय के गेस्ट हाउस के अंदर TIMES NOW का स्टिंग, बिना बिल सोना-चांदी लेने की बात

राम मंदिर चंदा चोरी मामले के बीच टाइम्स नाउ ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया, जिसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के गेस्ट हाउस और उनके करीबी सहयोगियों से जुड़े कई चौंका देने वाले खुलासे किए गए। स्टिंग आपरेशन में सामने आया कि चंपत राय के सहयोगियों ने दान सीधे उन तक पहुंचाने, सीसीटीवी कैमरों से बचकर दान देने की व्यवस्था करने और बिना बिल के सोना-चांदी स्वीकार करने की बात कही।

कई दिनों तक मीडिया के लिए बंद रहे ट्रस्ट गेस्ट हाउस के दरवाजे उस समय खोल दिए गए, जब अंडरकवर टीम ने खुद को चांदी दान करने वाला बताया। टीम को उस वक्त बताया गया कि ट्रस्ट के भीतर चंपत राय को ‘बाबूजी’ के नाम से जाना जाता है और उनसे मुलाकात कराई जा सकती है।

स्टिंग में खुद को चंपत राय का करीबी सहयोगी बताने वाले प्रद्युम्न नामक व्यक्ति ने कथित तौर पर कहा कि अगर दानदाता सीसीटीवी कैमरों से बचकर दान देना चाहते हैं तो उसकी भी व्यवस्था कर दी जाएगी। साथ ही प्रद्युम्न नामक व्यक्ति ने इस बात की पुष्टि की कि चंपत राय उसी समय गेस्ट हाउस में मौजूद हैं और लगातार बैठकें कर रहे हैं। हालांकि, चंदा चोरी का मामला सामने आने के बाद से चंपत राय सार्वजनिक तौर पर लोगों की नजरों से ओझल रहे हैं।

 

सबसे ज्यादा चिंता की बात तो यह थी कि प्रद्युम्न ने अंडरकवर टीम से दान देने से पहले एक हलफनामा तैयार करने को कहा, जिसमें दानादाता यह घोषित करे कि दान किए गए सोने या चांदी पर उसका कोई अधिकार नहीं रहेगा। इसके बाद ट्रस्ट उस दान का किसी भी प्रकार से उपयोग करने के लिए स्वतंत्र होगा। आपको यह भी बता दें कि दान किए जा रहे सोने-चांदी का मूल खरीद बिल नहीं मांगा गया।

टाइम्स नाउ के पत्रकारों से बातचीत के दौरान कई बार ऐसे संकेत दिए गए कि दान सीधे चंपत राय तक पहुंचाया जाएगा और पूरी प्रक्रिया उनकी देखरेख में होगी। ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है कि जब दान की प्रक्रिया उनके प्रत्यक्ष नियंत्रण में बताई जा रही है, तो क्या वह इस व्यवस्था से खुद को अलग बता सकते हैं?

उत्तर प्रदेश पुलिस ने अब तक एक करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, अमेरिकी डॉलर और सोने के आभूषण बरामद किए हैं। हालांकि, टाइम्स नाउ की जांच में चौंकाने वाली बात सामने आई है कि गिरफ्तार किए गए कई आरोपी महाकुंभ के पहले आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में थे। उदाहरण के तौर पर आरोपी अविनाश शुक्ला को अपनी पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था, जबकि पुलिस के अनुसार, उनके पास से 20 लाख रुपये से अधिक नकदी, 1,121 अमेरिकी डॉलर और सोने के आभूषण बरामद किए गए। पुलिस ने दो जुलाई को उसे 24 घंटे की रिमांड पर लिया है।

सबसे बड़ा सवाल तो यह खड़ा होता है कि क्या आरोपी असल में इस पैसों के अंतिम लाभार्थी थे या फिर किसी और के लिए नकदी और कीमती सामान की देखभाल कर रहे थे? टाइम्स नाउ के स्टिंग ऑपरेशन ने इसमें एक नया पहलू शामिल किया – ट्रस्ट के करीबियों ने बार-बार संकेत दिए कि दान चंपत राय की देखरेख में ही भेजा जाएगा।

एसआईटी की जांच में एक योग प्रशिक्षक का भी उल्लेख है, जिसका कथित तौर पर इस नेटवर्क के साथ संबंध है। हालांकि, सार्वजनिक रूप से ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं, जो उस व्यक्ति की संलिप्तता को साबित करें। फिलहाल मामले की जांच चल रही है।

स्टिंग ऑपरेशन के दौरान, जब अंडरकवर टीम ने खुद को कारोबारी बताकर बिना मूल बिल के सोना दान करने की बात कही, तब भी सहयोगियों ने उसे दान के रूप में स्वीकार करने की बात कही। बदले में केवल एक लिखित घोषणा मांगी गई कि दानदाता भविष्य में उस सोने पर कोई दावा नहीं करेगा।

दूसरी बार टीम ने बिना बिल और जानबूझकर नकली आभूषणों के साथ भी संपर्क किया, लेकिन कथित तौर पर बिना किसी जांच के उन्हें स्वीकार करने की सहमति जताई गई। यह एक गंभीर मुद्दा है, जो राम मंदिर चंदा चोरी मामले में टाइम्स नाउ की जांच के केंद्र में है।

इस बीच, पुलिस सूत्रों ने बताया कि अयोध्या पुलिस ने बुधवार को मामले में नए सिरे से तलाशी अभियान चलाया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान एक क्यूआर कोड लगी दान पेटी, नकदी, सोना, चांदी और विदेशी मुद्रा बरामद की गई। पुलिस ने आरोपी लवकुश मिश्रा के घर की भी तलाशी ली और उसके पिता बच्चू लाल मिश्रा से पूछताछ की।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अबतक विभिन्न आरोपियों से लाखों रुपये की नकदी बरामद की। अविनाश शुक्ला से 20.39 लाख, करुणेश पांडे से 18.07 लाख, अनुकल्प मिश्रा से 16.82 लाख, लवकुश मिश्रा से 14.25 लाख, रमाशंकर मिश्र से 7.32 लाख और रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू से एक लाख रुपये जब्त किए गए।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की। इसके आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई और दान गिनने की प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया।

जांच में उस वक्त तेजी आई जब पुलिस ने कोर्ट से अनुमति लेने के बाद आरोपी अविनाश शुक्ला से पूछताछ की और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का भी बयान दर्ज किया, जिन्होंने हाल ही में मामले को गर्माता देख नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे दे दिया। हालांकि, अभी तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है।

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