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नेपाल में बाढ़ का विकराल रूप, सड़कें ध्वस्त और यातायात ठप; हजारों परिवारों की बढ़ी चिंता

नेपाल में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। त्रिशूली नदी के उफान से कई जगह सड़कें और यातायात मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं। धादिंग जिले के मलेखु इलाके में सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के बाद काठमांडू को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला प्रमुख पृथ्वी राजमार्ग बाधित हो गया है।

मुख्य मार्ग बंद होने के कारण बड़ी संख्या में यात्री और मालवाहक वाहन रास्ते में फंस गए हैं। अब यातायात को वैकल्पिक मार्गों से संचालित करने की कोशिश की जा रही है। इससे सफर का समय बढ़ने के साथ जरूरी सामान की सप्लाई पर भी असर पड़ने लगा है।

तीन वैकल्पिक रास्तों से यातायात संभालने की कोशिश

मुख्य राजमार्ग के बाधित होने के बाद यात्रियों को काठमांडू पहुंचाने के लिए तीन वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

पहला रास्ता हेटौंडा से दामन, पालुंग और नौबिसे होते हुए त्रिभुवन राजपथ का है। इस मार्ग पर कई तीखे मोड़ होने के कारण बड़े और भारी वाहनों की आवाजाही सीमित है।

दूसरा विकल्प हेटौंडा-भीमफेदी-कुलेखानी मार्ग है। यह रास्ता अपेक्षाकृत संकरा है, इसलिए यहां मुख्य रूप से छोटे और हल्के वाहनों को चलाया जा रहा है।

तीसरे मार्ग के तौर पर हेटौंडा से मकवानपुरगढ़ी, ठिंगन और छपेली होते हुए ललितपुर जाने वाले रास्ते का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस मार्ग से अपेक्षाकृत बड़े वाहनों को भी निकालने की कोशिश की जा रही है।

रसुवा में कई इलाके बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में

रसुवा जिले में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। टिमुरे, रसुवागढ़ी, स्याफ्रूबेंसी, मैलुंग, बेट्रावती, धुन्चे, पैरेबेसी, खल्ली बस्ती, सोले, शान्तिबाजार, सल्लेटर और त्रिशूली क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित बताए जा रहे हैं।

बाढ़ के तेज बहाव के साथ आए मलबे ने कई स्थानों पर सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। कुछ इलाकों में संपर्क मार्ग बाधित होने से राहत और बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

मलेखु में करीब 60 मीटर सड़क धंसी

धादिंग जिले के मलेखु के शीतल बाजार क्षेत्र में बाढ़ के दबाव के कारण सड़क का लगभग 60 मीटर हिस्सा धंस गया। कृष्णभीर और मलेखु के पास परेवाभीर क्षेत्र में भी सड़क क्षतिग्रस्त होने से यातायात प्रभावित हुआ है।

काठमांडू से आने-जाने वाले लोगों के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सड़क टूटने के कारण वाहनों को लंबे वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।

आवागमन बाधित होने का असर जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। स्थानीय स्तर पर गैस और अन्य आवश्यक सामान की उपलब्धता को लेकर परेशानी बढ़ने की बात सामने आ रही है।

महराजगंज के सीमावर्ती परिवारों की बढ़ी चिंता

नेपाल में आई आपदा का असर भारत-नेपाल सीमा से जुड़े परिवारों पर भी दिखाई दे रहा है। महराजगंज जिले के कई परिवारों के रिश्तेदार नेपाल के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं। बाढ़ और भूस्खलन की खबरों के बाद इन परिवारों की चिंता बढ़ गई है।

ठूठीबारी, बरगदवा, निचलौल, पारसमलिक, परसौनी, नौतनवा और सोनौली जैसे सीमावर्ती इलाकों में नेपाल से पारिवारिक और सामाजिक संबंध रखने वाले लोगों की संख्या काफी है।

कई लोग अपने रिश्तेदारों, बेटी-दामाद या कारोबार के सिलसिले में नेपाल गए लोगों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन आपदा के कारण सड़कें बाधित होने के साथ कई जगह मोबाइल नेटवर्क और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। ऐसे में लोगों को अपने करीबियों की स्थिति की जानकारी हासिल करने में मुश्किल हो रही है।

फोन नहीं लगने से बढ़ी बेचैनी

सीमावर्ती गांवों और कस्बों में रहने वाले परिवार लगातार नेपाल में मौजूद अपने परिजनों से संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं। कई नंबरों पर फोन नहीं लग रहा है या नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने का संदेश मिल रहा है।

सड़क और संचार व्यवस्था दोनों प्रभावित होने के कारण लोगों की बेचैनी और बढ़ गई है। परिवारों को उम्मीद है कि हालात जल्द सामान्य होंगे और प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था बहाल की जाएगी।

नेपाल में बाढ़ के बाद उत्पन्न स्थिति ने न केवल वहां की यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि भारत-नेपाल सीमा से जुड़े परिवारों और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर डाला है। अब लोगों की नजर राहत-बचाव अभियान और क्षतिग्रस्त सड़कों की बहाली पर है।

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