
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। आयोग के सामने कर्मचारी और पेंशनर संगठन वेतन, पेंशन और भत्तों में संशोधन के साथ-साथ पुराने पेंशनर्स के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हैं। इनमें सिविलियन कर्मचारियों के लिए One Rank One Pension (OROP) और Notional Fixation की मांग सबसे अहम मुद्दों में शामिल हो गई है।
8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस समयसीमा के अनुसार आयोग की रिपोर्ट 2027 के मध्य तक सरकार को सौंपी जा सकती है। फिलहाल आयोग विभिन्न कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और पेंशनर्स के प्रतिनिधियों से सुझाव और मांगें ले रहा है।
पुराने और नए पेंशनर्स के बीच अंतर क्यों बना हुआ है?
पेंशनर्स की सबसे बड़ी चिंता अलग-अलग समय पर रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन में आने वाला अंतर है। समान पद, समान लेवल और लगभग समान सेवा अवधि होने के बावजूद रिटायरमेंट का वर्ष बदलने से पेंशन में काफी अंतर पैदा हो सकता है।
यही वजह है कि पुराने पेंशनर्स चाहते हैं कि नए वेतन आयोग का लाभ केवल भविष्य में रिटायर होने वाले कर्मचारियों तक सीमित न रहे। उनका कहना है कि पहले से रिटायर कर्मचारियों की पेंशन को भी नए वेतनमान के अनुरूप संशोधित किया जाना चाहिए।
OROP की मांग क्यों उठ रही है?
सिविलियन कर्मचारियों और पेंशनर्स के कुछ संगठन चाहते हैं कि One Rank One Pension जैसी व्यवस्था लागू की जाए। इसका मूल उद्देश्य समान पद या स्तर और समान अथवा तुलनीय क्वॉलीफाइंग सर्विस वाले पेंशनर्स के बीच रिटायरमेंट की तारीख के कारण पैदा होने वाले बड़े अंतर को कम करना है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सिविलियन कर्मचारियों के लिए OROP अभी सरकार द्वारा मंजूर योजना नहीं है। फिलहाल यह कर्मचारी और पेंशनर संगठनों की मांग है, जिस पर 8वां वेतन आयोग विचार कर सकता है।
Notional Fixation बन सकता है अहम रास्ता
पुराने पेंशनर्स के लिए Notional Fixation भी महत्वपूर्ण मांग है। आसान भाषा में इसका मतलब है कि पुराने पेंशनर्स की पेंशन को नए वेतनमान के आधार पर काल्पनिक रूप से दोबारा निर्धारित किया जाए।
इससे अगर नए वेतन आयोग के बाद किसी पद की पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी होती है, तो पुराने पेंशनर्स को भी उसका उचित लाभ देने का रास्ता बन सकता है। यही व्यवस्था पुराने और नए पेंशनर्स के बीच पेंशन के अंतर को कम करने में मदद कर सकती है।
3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग भी चर्चा में
कर्मचारी संगठनों की ओर से 3.833 फिटमेंट फैक्टर जैसी मांगें भी सामने रखी गई हैं। फिटमेंट फैक्टर के जरिए मौजूदा बेसिक पे या पेंशन को नए वेतनमान में बदलने का आधार तय किया जाता है।
हालांकि, किसी संगठन द्वारा मांगा गया फिटमेंट फैक्टर और सरकार द्वारा अंतिम रूप से स्वीकार किया गया फिटमेंट फैक्टर अलग हो सकता है। इसलिए फिलहाल 3.833 को निश्चित फिटमेंट फैक्टर मानना सही नहीं होगा।
हर 5 साल में पेंशन संशोधन की मांग
पेंशनर्स से जुड़े संगठनों की ओर से एक और महत्वपूर्ण मांग यह है कि वेतन और पेंशन में संशोधन के लिए केवल 10 साल के वेतन आयोग चक्र पर निर्भर रहने के बजाय हर 5 साल में समीक्षा की व्यवस्था हो।
अगर ऐसी व्यवस्था स्वीकार होती है, तो भविष्य में कर्मचारियों और पेंशनर्स को लंबे समय तक अगले वेतन आयोग का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
अभी क्या तय है और क्या सिर्फ मांग?
फिलहाल 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया जारी है। OROP, 3.833 फिटमेंट फैक्टर, Notional Fixation और हर 5 साल में संशोधन—इनमें से किसी को भी अभी अंतिम सरकारी फैसला नहीं माना जा सकता।
आयोग विभिन्न पक्षों की मांगों और सुझावों पर विचार करेगा और अपनी सिफारिशें सरकार को देगा। इसके बाद सरकार यह तय करेगी कि आयोग की कौन-कौन सी सिफारिशें स्वीकार की जाएंगी और किस रूप में लागू होंगी।
इसलिए आने वाले महीनों में पेंशनर्स की सबसे बड़ी नजर इस बात पर रहेगी कि 8वां वेतन आयोग पुराने पेंशनर्स के लिए क्या व्यवस्था सुझाता है। अगर OROP या Notional Fixation जैसी मांगों को सकारात्मक सिफारिश मिलती है, तो अलग-अलग पीढ़ियों के पेंशनर्स के बीच मौजूद पेंशन अंतर को कम करने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।




