सेवा की कहानी : संवेदना की कमी से मुड़ने लगीं उंगलियां, समय पर उपचार और पुनर्वास से लौटी आत्मनिर्भरता

जिले में अब तक 578 कुष्ठ रोगियों की पहचान
रायपुर, कभी दूसरों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने वाले ऑटो चालक की अपनी जिंदगी ही मुश्किलों के मोड़ पर आकर ठहर गई थी। शरीर पर हल्के रंग के दाग और संवेदना में कमी को नजरअंदाज करना बागबाहरा निवासी जो पेशे से ऑटो चालक है, उनके लिए मुश्किलों का कारण बन गया। धीरे-धीरे बीमारी का असर बढ़ा और हाथों की उंगलियों में विकृति आने लगी। खाना खाने, कपड़े पहनने और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होने लगी। आज उपचार और पुनर्वास की मदद से वे फिर से मोटरसाइकिल चलाने में सक्षम हैं। उल्लेखनीय है कि महासमुंद जिले में अब तक 578 कुष्ठ रोगियों की पहचान की गई है, जिनका उपचार जारी है। रोग से संबंधित विकृतियों के सुधार के लिए 15 मरीजों की रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की जा चुकी है, जबकि ग्रेड-2 विकृति के 19 मामले दर्ज किए गए हैं।
उन्हें शुरुआत में पता नहीं था कि शरीर पर दिखाई देने वाले दाग कुष्ठ रोग के लक्षण हो सकते हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने से उनकी स्थिति बिगड़ती गई और आजीविका चलाना भी चुनौती बन गया। स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से उपचार शुरू होने पर उन्हें निर्धारित बहु औषधि उपचार (एमडीटी) का पूरा कोर्स कराया गया। इसके साथ जिला चिकित्सालय में रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी (आरसीएस) की गई। नियमित चिकित्सकीय देखरेख और फॉलोअप से उनकी कार्यक्षमता में सुधार आया। आज वे फिर से स्वयं मोटरसाइकिल चलाने में सक्षम हैं। दैनिक जीवन के कामों में आत्मनिर्भरता की ओर उनकी वापसी उनके लिए नई उम्मीद और आत्मविश्वास का आधार बनी है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर. के. सिंह कुशवाहा ने बताया कि शरीर पर हल्के रंग के दाग के साथ संवेदना में कमी, हाथ-पैरों में सुन्नपन या मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए। समय पर उपचार से विकलांगता और स्थायी विकृति के जोखिम को कम किया जा सकता है। कुष्ठ रोग का उपचार एमडीटी से संभव है तथा आवश्यकता पड़ने पर रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी और पुनर्वास से कार्यक्षमता में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग छूने, साथ बैठने, बातचीत करने या सामान्य सामाजिक मेलजोल से नहीं फैलता। इसलिए रोग से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति भेदभाव नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें सम्मान, सहयोग और समान अवसर प्रदान करने चाहिए।




