छत्तीसगढ़

सेवा संकल्प अभियान : प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने बदली हेमलाल चुरेन्द्र की आर्थिक तस्वीर

पॉण्ड लाइनर निर्माण से वैज्ञानिक मत्स्य पालन की ओर बढ़े हेमलाल, अब प्रतिवर्ष करीब 6 लाख रुपए की हो रही आय

रायपुर, 

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने बदली हेमलाल चुरेन्द्र की आर्थिक तस्वीर
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने बदली हेमलाल चुरेन्द्र की आर्थिक तस्वीर

सेवा संकल्प अभियान 2026 के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की सेवा की कहानियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आ रहे सकारात्मक बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के साथ किसानों को स्वरोजगार और आय का बेहतर अवसर मिल रहा है। इसी क्रम में मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के विकासखंड मोहला के ग्राम दुग्गाटोला निवासी मत्स्य कृषक श्री हेमलाल चुरेन्द्र ने योजना का लाभ लेकर अपनी स्वयं की भूमि पर पॉण्ड लाइनर का निर्माण कराया और वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन प्रारंभ कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने बदली हेमलाल चुरेन्द्र की आर्थिक तस्वीर

       श्री हेमलाल चुरेन्द्र को वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत स्वयं की भूमि पर पॉण्ड लाइनर निर्माण के लिए विभागीय अनुदान का लाभ मिला। योजना से प्राप्त सहायता से उन्होंने अपनी भूमि पर पॉण्ड लाइनर का निर्माण कराया। इसके बाद उन्होंने विभागीय मार्गदर्शन में वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन की शुरुआत की। वर्तमान में वे गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज संचयन, संतुलित आहार प्रबंधन एवं जल गुणवत्ता प्रबंधन जैसी गतिविधियों को अपनाकर मत्स्य उत्पादन कर रहे हैं।

      मत्स्य पालन में आधुनिक तकनीकों को अपनाने से श्री हेमलाल के उत्पादन और आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वे नियमित रूप से जल की गुणवत्ता का परीक्षण करने के साथ एरिएशन जैसी तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज, संतुलित आहार और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से उन्होंने मत्स्य उत्पादन को बेहतर बनाया है। योजना के माध्यम से मिले सहयोग और विभागीय मार्गदर्शन ने उनके लिए मत्स्य पालन को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

       श्री हेमलाल चुरेन्द्र वर्तमान में मत्स्य पालन से लगभग 5 से 6 लाख रुपए का वार्षिक कारोबार कर रहे हैं तथा उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 6 लाख रुपए तक की आय प्राप्त हो रही है। मत्स्य पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने से उनकी आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में मजबूत हुई है और परिवार की आय का एक स्थायी स्रोत विकसित हुआ है।

        श्री हेमलाल कहते है कि किसान पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य पालन को अपनाकर अपनी आय के अतिरिक्त साधन विकसित कर सकते हैं। उनका मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन करें और विभागीय मार्गदर्शन के अनुसार कार्य करें, तो कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर आय में वृद्धि की जा सकती है।

         सेवा संकल्प अभियान के दौरान श्री हेमलाल चुरेन्द्र की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि शासन की योजनाएं केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हितग्राहियों को स्वरोजगार, आधुनिक तकनीक और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का माध्यम भी बन रही हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से प्राप्त सहयोग ने श्री हेमलाल के लिए मत्स्य पालन को आय के प्रभावी साधन में बदलने का अवसर दिया है और अब वे वैज्ञानिक मत्स्य पालन के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त होकर आगे बढ़ रहे हैं।

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