’सेवा की कहानी’ : कठिन रहा है टूटे परिवार से अपने मकान तक प्रमिला का सफर

कोरिया . कठिन परिस्थितियों में एक छोटी सी मदद भी बड़ी आस जगा देती है। अपने परिवार से अलग हुई प्रमिला के लिए प्रधानमंत्री जनमन आवास ने एक ऐसा संबल दिया है जिससे वह अपने मायके में रहकर ही सम्मान से आजीविका चला रही हैं। जब उनके ससुराल से उन्हे बेघर कर दिया गया तो उनके जीवन में कठिनाई का दौर बेहद संघर्षपूर्ण हो गया था। ऐसे मेें अपने पिता के गांव में आकर जीवन यापन करना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सोच ने इस विषेष पिछड़ी जनजाति की परित्यक्ता महिला के जीवन को बड़ा सहारा दिया है।
टूटे मन से कठिन जीवन
कोरिया जिले के बैकुंठपुर जनपद पंचायत का दूरस्थ ग्राम पंचायत गेजी एक अनुसूचित जनजाति बाहुल्य गांव है। यहां के निवासी बालम के परिवार मे पैदा हुई प्रमिला का बालिग होते ही विवाह हो गया। अपने दांपत्य जीवन की शुरुआत उसने अपने ससुराल मे कई सपने लेकर की। लेकिन पारिवारिक विसंगतियों ने उसे अपने पति से अलगाव की कगार पर ला दिया। अपने जीवन के कई सपने लेकर ससुराल गई प्रमिला के लिए वापस मायके आकर अपना जीवन चलाने की मजबूरी सामने आ गई। वह कुछ दिनों तक अपने पिता के घर पर थीं और मजदूरी से अपना जीवन यापन करने लगी।
जनमन ने बदला जीवन
श्रमिक परिवार से होने के कारण प्रमिला के लिए आजीविका की उतनी कठिनाई नहीं थी जितनी कठिनाई उसे अपनी छत को लेकर थी। ऐसे में प्रधानमंत्री जनमन आवास ने उसके कठिन जीवन को एक मनचाहा सहारा प्रदान किया। जनमन आवास योजना से मिली राशि से प्रमिला का अपना पक्का सुरक्षित मकान बनकर तैयार है और अब वह बकरी पालन के साथ मजदूरी करके आसानी से अपना जीवन यापन करने लगी हैं।
परिवार टूटा पर मन की दृढ़ता से बनी बात
ग्राम पंचायत गेजी में रहने वाली परित्यक्ता प्रमिला ने कहा कि शादी के बाद जब पारिवारिक संबंध पति और ससुराल से टूटे तो उसका जीवन बेहद कठिन हो गया था। ऐसे में पिता के घर पर रहना उनके लिए हमेषा संकोच और निराषा का भाव लाता था। प्रधानमंत्री जनमन योजना से बने आवास से अब उनका खुद का ठिकाना सुनिश्चित हुआ है और वह अपनी मेहनत से नई शुरुआत करने के लिए तैयार हैं।




